बिहार में पंचायतों का नया चुनाव होने तक परामर्शी अध्यक्ष के रूप में मुखिया,सरपंच,प्रमुख और जिला परिषद अध्यक्ष करेंगे काम
पंचायतीराज मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा सम्यक विचारधारात्मक पंचायतीराज निकायों का लोकतांत्रिक स्वरूप कायम रखने और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए परामर्शी समिति  का गठन होने जा रहा है। इसके बाद परिस्थिति अनुकूल होने हो चुनाव होंगे।फिलहाल कोरोना से जंग जीतना और बाढ एव॔ सूखा के आसन्न संकट से निपटने सरकार की प्रथमिकता है।
 पंचायतीराज मंत्री महोदय ने  बताया कि इस दौरान निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के वेतन एवं भत्ता भी मिलता रहेगा! यह व्यवस्था आगामी चुनाव के बाद त्रिस्तरीय पंचायत के गठन तक जारी रहेगी।
नीतीश कैबिनेट की 10 एजेंडों पर लगी मुहर  ,जिसमें कोविड से मरने वाले लोगों के परिजनों के लिए 4-4 लाख का मुख्यमंत्री अनुग्रह अनुदान राशि देने के लिए 300 करोड़ की राशि स्वीकृत की गयी है. इसके साथ ही दानापुर बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर के वास्ते अधिगृहित की जाने वाली जमीन खरीद के लिए राशि स्वीकृत की जाएगी.

पटना,08 जून। बिहार में पंचायत चुनाव फिलहाल कम से कम छह महीने के लिए टलने की नौबत के बीच सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायतीराज निकायों की देखरेख नये चुनाव होने तक मौजूदा मुखिया,प्रमुख, जिला परिषद अध्यक्ष और सरपंच की अध्यक्षता में गठित परामर्शी समिति के हवाले करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की आज सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता मे हुई । बैठक में कुल 10 एजेंडों पर मुहर लगी है.। पंचायत प्रतिनिधियों को  परामर्शी समिति का अध्यक्ष व सदस्य नामित करने के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद की बैठक में मुहर लगी है.

 सरकार के इस निर्णय के बाद पंचायत के मुखिया का पदनाम प्रधान परामर्शी समिति ग्राम पंचायत होगा। प्रधान परामर्शी समिति वह सभी काम करेगी, जो एक निर्वाचित मुखिया करते हैं।
वस्तुत:73वें संविधान संशोधन के तहत पंचायत निकायों का कार्यकाल पांच वर्ष निर्धारित है। इसकी कार्यावधि नहीं बढायी जा सकती। सरकार ने बीच का रास्ता निकालने के लिए पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन कर नियत समय पर चुनाव नहीं होने के कारण नये चुनाव होने तक परामर्शी समिति बनाकर काम चलाने की पहली बार नयी व्यवस्था की है। यह मौजूदा निर्वाचित जन प्रतिनियोजन का नये चुनाव तक बिना पद पर रहते परामर्शी के रूप में काम करने की छूट दी गयी है। रोचक है इस नयी व्यवस्था होने से किसी निश्चित अवधि में चुनाव कराने की कानूनी बाध्यता सरकार पर नहीं रह गयी है। जब सरकार उचित समझेगी,तब चुनाव होगा।
इसके साथ ही पंचायती राज विभाग के  परामर्शी समिति में अध्यक्ष-सदस्य बनाने के प्रस्ताव पर मुहर लगी है. पंचायत के मुखियागण  अब पंचायत परामर्शी समिति के अध्यक्ष होंगे।वहीं जिला परिषद के अध्यक्ष जिला परिषद परामर्श समिति के अध्यक्ष तो प्रमुख पंचायत समिति परामर्शी समिति के अध्यक्ष होंगे.

त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्था का कार्यकाल 15 जून को खत्म हो रहा है फिर भी पंचायत प्रतिनिधि काम करते रहेंगे. चुनाव होने तक सिर्फ नाम में परिवर्तन होगा. 16 जून से सभी पंचायत प्रतिनिधि परामर्श समिति के अध्यक्ष या सदस्य के तौर पर काम करेंगे. वार्डो में गठित प्रबंधन एवं क्रियान्वयन समिति भी काम करती रहेगी.
परामर्शी समितियों की बैठक में सरकार के प्रतिनिधि के रूप में शामिल होने की नयी व्यवस्था हुई है।
 प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी, अंचल निरीक्षक और प्रखंड समन्वयक कार्यकारी समिति में सरकार के प्रतिनिधि के रूप में रहेंगे. समिति की बैठक में मौजूद रहेंगे. इन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा. योजनाओं में अनियमितता को रोकने और विभाग के संज्ञान में लाने की जिम्मेदारी इनकी होगी.
 बिहार पंचायती राज कानून में संशोधन के लिए बिहार सरकार अध्यादेश ला चुकी है।जिसपर बीते 3 जून को ही राज्यपाल फागू चौहान ने 15 जून बाद त्रिस्तरीय पंचायतों के संचालन के लिए कानून में संशोधन और परामर्शी समिति के गठन के प्रस्ताव पर मुहर भी लगा दी थी। कैबिनेट ने आज परामर्शी समिति के गठन संबंधी नियमावली पर मुहर लगा दी है ।


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