शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) योग्यता प्रमाण पत्र की 7 साल की जगह आजीवन होगी  वैधता

नई दिल्ली, 03 जून। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने गुरुवार को घोषणा की कि सरकार ने 2011 से पूर्वव्यापी प्रभाव से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) योग्यता प्रमाण पत्र की वैधता अवधि को 7 साल से बढ़ाकर आजीवन करने का फैसला किया है. 2020 में, राष्ट्रीय परिषद के लिए शिक्षक शिक्षा (एनसीटीई) ने सामान्य निकाय की अपनी 50 वीं बैठक में टीईटी प्रमाणपत्र की वैधता को 7 साल से बढ़ाकर जीवन भर के लिए मंजूरी दे दी थी.

सरकारी स्कूल्स में शिक्षक की नौकरी पाने के लिए टीईटी पास करना जरूरी है. पहले टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट सर्टिफिकेट की वैधता सिर्फ 7 साल तक के लिए होती थी. 
शिक्षक बनने के लिए टीईटी एक अनिवार्य योग्यता है. दिशानिर्देशों के अनुसार, 11 फरवरी, 2011 को, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने निर्धारित किया कि टीईटी राज्य सरकारों द्वारा आयोजित की जाएगी और प्रमाण पत्र की वैधता परीक्षा उत्तीर्ण करने की तारीख से सात साल के लिए थी. शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि वर्ष 2011 से टीईटी  की आजीवन  वैधता लागू होगी. यानी जिन उम्मीदवारों ने 2011 में टीईटी पास किया है, उनके टीईटी सर्टिफिकेट भी अब उम्रभर वैध रहेंगे. अब 7 साल की जगह आजीवन होगी ।

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