बिहार: राज्यपाल ने पंचायत चुनाव होने तक मुखिया,प्रमुख, जिला परिषद अध्यक्ष और सरपंच  का कामकाज परामर्शी समिति के माध्यम से करने संबंधित  अध्यादेश की दी मंजूरी

पटना,02 जून। राज्यपाल फागू चौहान ने आज बिहार में पंचायत चुनाव होने तक मुखिया,प्रमुख, जिला परिषद अध्यक्ष और सरपंच का कामकाज परामर्शी समिति के माध्यम से करने संबंधित  अध्यादेश की  मंजूरी दे दी। इसके साथ-साथ विधि विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी।
अधिसूचना में बिहार पंचायतीराज अधिनियम 2006 की धारा ,14,39,66 और 92 में संशोधन होगा।
पंचायतीराज मंत्री सम्राट चौधरी ने The News Words से बातचीत में कहा बिहार पंचायतीराज अधिनियम, 2006 में पांच वर्षों की कार्यविधि पूरी होने के बाद पंचायत चुनाव नहीं होने की दशा में  पंचायत निकायों का कामकाज संपादित करने के लिए  ग्रामपंचायत, पंचायत समिति अंक जिला परिषद के लिए  अलग-अलग परामर्शी समिति का गठन होगा।अधिनियम में संशोधन संबंधित अध्यादेश जारी हो गया है।इससे अधिनियम में चार प्रमुख  संशोधन संबंधित प्रावधान केआलोक में पंचायतीराज विभाग नियमावली में संशोधन करेगा। 
पंचायतीराज मंत्री ने कहा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पंचायत निकायों के कामकाज में जनभागीदारी सुनिश्चित करने के हिमायती है। सत्ता में सहभागी भाजपा भी पंचायतीराज व्यवस्था में नौकरशाही से ज्यादा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को महत्व देना चाहती है।इसलिए 15 जून को निर्वाचित जन प्रतिनिधियों का पाच वर्षों का कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद अफसरों को प्रशासक नियुक्त करने की बजाय परामर्शी समिति गठित होगी। पंचायतों का नया चुनाव होने तक समिति काम करेगी।
पंचायतीराज मंत्री ने परामर्शी समितियो में सभी निवर्तमान निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को शामिल किये  का भी साफ संंकेत दिया। 
श्री चौधरी ने कहा कि  परिस्थिति अनुकूल होने पर यथासंभव जल्द से जल्द चुनाव कराने के लिए भी सरकार प्रतिबद्ध है। कोरोना संक्रमण और ईवीएम से ही चुनाव कराने की तैयारी के बीच चुनाव टलने कोनौबत आयी है।
पंचायतीराज मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि पये चुनाव होने तक  पंचायतीराज निकायों के माध्यम से कम से कम 10 हजार करोड़ रुपए विभिन्न विकास योजनाओं पर खर्च होने हैं।नियत समय पर चुनाव नहीं होने के कारण विकास योजनाओं के लाभ से आमजनों को वंचित नहीं किया जा सकता है।

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