राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग  ने कलकत्ता हाईकोर्ट में पेश की जांच रिपोर्ट


कोलकाता,15 जुलाई। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा पर अपनी रिपोर्ट कलकत्ता उच्च न्यायालय की पांच-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष आज पेशकश दी  । इसमें कहा गया है पश्चिम बंगाल में कानून का शासन नहीं है. यहां शासक का कानून है.  एनएचआरसी की टीम ने अपनी रिपोर्ट में पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश की है. 

राज्य में हिंसक घटनाओं में पीड़ितों की दुर्दशा के प्रति राज्य सरकार की भयावह उदासीनता को दर्शाता है। आयोग ने कहा है कि यह मुख्य विपक्षी दल के समर्थकों के खिलाफ सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों द्वारा की गई प्रतिशोधात्मक हिंसा थी। इसके परिणामस्वरूप हजारों लोगों के जीवन और आजीविका में बाधा उत्पन्न की गई और उनका आर्थिक रूप से गला घोंट दिया गया।

मानवाधिकार आयोग की टीम ने कहा है कि कोर्ट की निगरानी में चुनाव बाद हिंसा की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाये। साथ ही पूरे मामले की सुनवाई बंगाल के बाहर कराये जाने की सिफारिश टीम ने की है।
 कलकत्ता हाइकोर्ट के निर्देश पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बंगाल में चुनाव बाद हिंसा की जांच के लिए एक टीम बनायी थी।
इस टीम ने पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों में जाकर पीड़ितों से मुलाकात की।वहां के हालात का जायजा लिया. पीड़ित परिवारों से बातचीत की और उसके बाद अपनी रिपोर्ट हाइकोर्ट को सौंपी है। दक्षिण कोलकाता के जादवपुर में जांच के दौरान न केवल मानवाधिकार आयोग की टीम को काम करने से रोका गया, बल्कि उन पर हमला भी किया गया।


Download Pdf
Top