सेहत:रूप और सौंदर्य  से संबंधित बीमारी का होमियोपैथी में है कारगर इलाज

 सौंदर्य के प्रति आकर्षण चेतन शील प्राणी का एक स्वाभाविक गुण है। क्या गुण सिर्फ आज ही नहीं वरन सृष्टि के साथ-साथ चली आ रही है। यह तथ्य जीवन के हर क्षेत्र में परिलक्षित होती है यह कहा जाए तो अतिशयोक्ति  नहीं होगी। रूप और सौंदर्य चेतनशील प्राणी रूपी गाड़ी के दो पहिए हैं। रूप से तात्पर्य है तन का ढांचा और सौंदर्य उस तन के गुण को दर्शाती है परंतु रूप और सौंदर्य साधारण बोलचाल की भाषा में एक ही अर्थ सुंदरता को प्रदर्शित करते हैं। मानव तो एक चेतनशील प्राणी है। हमेशा सौंदर्य पूर्ण वस्तुओं की प्राप्ति हेतु यथासंभव प्रयास करता है। यह प्रयास जन्म के पश्चात मृत्यु पर्यंत  जारी रहता है। या तो कामनाओं के क्षीर सागर में गोता लगाता रहता है और अपने अपने परिश्रम अनुसार मनोनुकूल तथा हर संभव प्राप्त भी करता है। सौंदर्य भिन्न-भिन्न, नारी सौंदर्य, पुरुष सौंदर्य, व्यक्तिगत सौंदर्य, सामाजिक सौंदर्य, गुणात्मक सौंदर्य, दिवस सौंदर्य, निशा सौंदर्य, आदि आदि न जाने  कितने नामों से संबोधित होती है मात्र जीतो प्राकृतिक का सूक्ष्मतम रूप है और सौंदर्य उसके गुण। सौंदर्य प्राकृतिक के सूक्ष्म रूपों को आंतरिक एवं बाह्य गुण है सर्वप्रथम वस्तु का वाह्रय सौंदर्य दृष्टि गोचर होती है और अंततोगत्वा आंतरिक सौंदर्य। किसी वस्तु के वाह्रय सौंदर्य अवलोकन हेतु लेश मात्र परिश्रम की आवश्यकता होती है। परंतु उसके अंत: सौंदर्य अवलोकन हेतु गहन मनन और चिंतन की। बाह्य सौंदर्य को देखकर हम अतः सुंदरता का अनुमान नहीं कर सकते। अंत: सौंदर्य का अनुमान करना आसान ही नहीं पेचीदा है ।
फलस्वरूप रूप और सौंदर्य से परिपूर्ण देश के भावी कर्णधारों को विश्व के इस धरती पर आने का निमंत्रण देते है जब वे विश्व प्रांगण मैं आकर किलकारी लगाते हैं तभी यह हम होम्योपैथिक चिकित्सक उसके माता-पिता और शुभचिंतक सबों की एक जिम्मेदारी होती है कि उनके जीवन के हर कदम पर पथ प्रदर्शक बने ताकि वे एक सुयोग्य नागरिक बन कर हम सबों को कृतार्थ करें। वह अपने जीवन में आगे बढ़कर हमारा स्थान ग्रहण करें या हमसे भी आगे की कुर्सी ग्रहण करें। यही उनके शुभचिंतकों की कामनाएं सदा उनके साथ होती है।
     यहां पर वस्तु विशेष अन्त: दृष्टि गोचर होती है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की लिखावट सुंदर न थी। यह उन्हें बराबर कमी महसूस होती थी। वे अक्सर कहा करते थे-अक्षर खराब होना अपूर्ण शिक्षा की निशानी है उनके लिए  सौंदर्य पूर्ण न थी। लेकिन उनकी अंतरात्मा तो ज्ञान रूपी सौंदर्य के असीम भंडार को संचित रखती थी। यह उनकी आंतरिक सुंदरता को दर्शाती है। यह कौन विश्व को दांतो तले उंगली दबाने के लिए बाध्य किया। महात्मा गांधी का रहन सहन वेशभूषा तो एक साधारण व्यक्ति से भी निम्न था। लेकिन वे अन्त: सौंदर्य के धनी थे। जरा हम नारियल फलों के तरफ दृष्टि डालें तो हमें देखेंगे कि उस फल का वाह्रय भाग रूक्ष तथा कठोर है परंतु उसका अंत भाग गिरी की तरह सरस और कोमल। उपयुक्त कथन तो उपयुक्त उदाहरण की पुष्टि करता है। फिर भी हमारी नजर दुनिया के  वाह्रय सौंदर्य की और आकर्षित करता है
विगत वर्ष हमारे एक एलोपैथिक मित्र के बच्ची की शादी एक संपन्न अभियंता के लड़के के साथ तय हो गई। बच्ची तो शील गुण संपन्न थी वरण उसके चेहरे पर  (काला काला धब्बे) थे जो  गोरी चेहरे पर काले धब्बे के समान मालूम पड़ती थी। इन काले दाग देखकर वर पक्ष शादी करने से इंकार कर रहे थे।संयोग से  मैं भी साथ में लड़की देखने  गया था। उन्हें आश्वासन दिया कि कोई बड़ी बात नहीं है यह दवा से ठीक हो जाएगा। मेरे परामर्शानुसार उसे
 ब्यूफो राणा 6नमबर का दी एक महीना  में  ही यह काले धब्बे  लुप्त हो गये। मेरे परामर्श उसके लिए वरदान तुल्य साबित हुआ। वैवाहिक कार्यक्रम बड़े धूमधाम से अपने जीवन रूपी नौका खे रहे हैं । अभी तक उसके बीच कोई दरारे नहीं है। इसी तरह एक‌ लड़की को‌ एक बाल नहीं था ,शादी मुश्किल हो रही थी।आज वैसा बाल के लिए मुहल्ले के लोग लालायित हैं।जरा सोचिए रोगी के अनुसार सुचयनित दबाएं रूप और सौंदर्य बनाए रखने में कितनी उपयोगी है।
आए दिन हमारे चिकित्सालय मैं युवक युक्तियां अपने चिकित्सा के लिए चेहरा विकृतियों की समस्या लेकर आते हैं खासकर शादी विवाह के अवसरों पर, खासकर उनकी समस्याएं कील मुंहासे बदरंग चेहरे सफेद दाग चेहरे की रंग विकृतियों विभिन्न प्रकार के मस्से आदि की होती है। हम होमियोपैथिक चिकित्सक उसके शरीर एवं मन के लक्षणों के आधार पर उनकी समस्याएं दूर करते हैं तथा उनकी सुंदरता में चार चांद लगा कर मित्र तुल्य साबित होते हैं।सौंदर्य दायिनी होम्योपैथिक औषधियां।
लक्षण के अनुसार 
 1-चेहरा तेलहा - नेट्रम म्यूर 200 एक बूंद एक बार रोज लेना चाहिए।
2-कील मुंहासे - कैल्केरिया 30 एक बूंद सुबह शाम, फास फास्फोरस 30 एक बूंद तीन बार रोज,कैल्के पिक्ररिक एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।
3-तरह-तरह के लंबे तथा नौकीले  मस्से -स्टेफिसैग्रिया एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।
4-फूल गोभी के छातो के सम्मान मस्से-थूजा एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।
5-गोल और कठोर मस्से- कास्टिकम एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।
6- गाल पर काले धब्बे-*नेट्रम म्युर30।सिपिया 30 दोनों से में एक-एक बूंद सुबह-शाम लेना चाहिए।
7-चेहरे पर गांठ कैल्केरिया फ्लोर 200एक बूंद एक बार रोज लेना चाहिए।आयोडम-200 एक बूंद एक बार रोज।साईलीसिया 200एक बूंद एक बार रोज लेना चाहिए।
8-गंदे भरे चेहरे-सोरीनम 200एक बूंद एक बार रोज लेना चाहिए।
9- चेहरा में खुजली-सल्फर 200 एक बूंद एक दिन छोड़कर सिर्फ सुबह में ही लेना है।
10-खुजली के कारण फटा चेहरा- ग्रैफाईटिस-200 एक बूंद सुबह शाम लेना चाहिए।
11-मुरझाए एवं सिकुड़े चेहरे-आर्जेनटम नाइट्रिकम30 एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।
12-ताम्बे के रंग के बदन पर धब्बे  -एल्यूमिना 30 एक बूंद तीन बार रोज।
13-शरीर का बदलते रंग -बेलाडोना 30 इग्नेशिया30फॉस्फोरस30 कोई भी दवा एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।
14-लाल-लाल धब्बे -एसिड नाइट्रिक 200 एक बूंद एक बार रोज लेना चाहिए।
15-ओठ पटना-नेट्रम म्यूर 200,हिपर सल्फर 200 एक बूंद एक बार सिर्फ सुबह में ही लेना है।
16-रुखा-सुखा चेहरा-आर्सेनिक एलवम 30 एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।
कोई भी दवा चिकित्सक की  सलाह से ही इस्तेमाल करें
       डॉ लक्ष्मी नारायण सिंह 
        होमियोपैथी अस्पताल
         फतुहा, पटना बिहार
        मो 9204090774

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